NavIC GPS को Indian Regional Navigation Satellite System (IRNSS) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ मिल कर विकसित किया गया है।

नाविक पूर्णत स्वदेशी विकसित तकनीक है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय मछुवारों (फिशर-मैन्स) को समरपित करते हुए ईश इंडियन जीपीएस का नाम नाविक रखा है।

भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (IRNSS) को आधिकारिक तौर पर NAVIC कहा जाता है जो Indian NAVigation के लिए एक संक्षिप्त शब्द है।

NavIC नेविगेशन सिस्टम प्रोजेक्ट पर क़रीब 120 करोड़ रुपये की लागत आई है। जिसमें 7 सैटेलाइट्स हैं। 7 नंबर सैटेलाइट वर्क करना शुरू करेगा। वैसा ही देसी नेविगेशन सिस्टम अमेरिका जितना सटीक हो जाएगा।

इसरो के अनुसार, IRNSS को स्थलीय, हवाई और समुद्री नेविगेशन, आपदा प्रबंधन, वाहन ट्रैकिंग और बेड़े प्रबंधन और मोबाइल फोन के साथ एकीकरण के लिए विकसित किया गया था।

यह सभी उपयोगकर्ताओं को Standard Positioning Service (SPS) और Restricted Service (RS) प्रदान करेगा, जो केवल अधिकृत उपयोगकर्ताओं के लिए एक एन्क्रिप्टेड सेवा है।

इसे 2019 में भारत में सभी वाणिज्यिक वाहनों के लिए अनिवार्य कर दिया गया था। NavIC 7 सैटेलाइट्स का एक ग्रुप है। जो भारत को पुरा कवर करने में सक्षम है।

अमेरिका के पास जो जीपीएस सिस्टम है वो 24 सैटेलाइट वाला है जो पूरी दुनिया को कवर करता है। हमारे जीपीएस सिस्टम की रेंज भले इंडिया तक है पर 5 मीटर की रेंज में ये एक्यूरेसी के साथ रिजल्ट बतायेगा।

NavIC का दावा है कि यह अधिक सटीक स्थान प्रदर्शन, और तेज़ टाइम-टू-फर्स्ट-फ़िक्स (TTFF) स्थिति अधिग्रहण को सक्षम करता है।

यह स्थान-आधारित सेवाओं की बेहतर गुणवत्ता की पेशकश भी करेगा। सिस्टम का दावा है कि प्राथमिक सेवा क्षेत्र में स्थिति सटीकता 20 मीटर से बेहतर है।

NavIC GPS क्या है? | Indian Navigation App NavIC कैसे प्रयोग करें? पूरी जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करें। 

Arrow