जब टैक्सपेयर किसी विशेष वर्ष के लिए वास्तविक आयकर बोझ की तुलना में ज्यादा इनकम टैक्स का भुगतान करता है, तब मूल्यांकन के बाद उसे अतिरिक्त धन वापस किया जाता है। इसे इनकम टैक्स रिफंड कहा जाता है।

करदाता को यह रिफंड तभी मिलता जब आयकर विभाग ITR को प्रोसेस करता है। आयकर विभाग आईटीआर को तभी प्रोसेस करता है जब ऑनलाइन या ऑफलाइन मोड के माध्यम से रिटर्न को वेरिफाई किया हो।

रिफंड की राशि या तो मेल खा सकती है, या आयकर विभाग द्वारा किए गए आकलन के आधार पर दावे से ज्यादा या कम हो सकती है।

एनएसडीएल की वेबसाइट पर आईटीआर रिफंड को ट्रैक करने के लिए सबसे पहले एनएसडीएल की वेबसाइट पर जाएं। अब एक वेब पेज दिखाई देगा,

जिसमें आपको पैन कार्ड (PAN Card) और आयु सहित अन्य जानकारी भरकर 'आगे बढ़ें' पर क्लिक करना होगा। अब आपकी इनकम टैक्स रिफंड की स्थिति प्रदर्शित होगी।

इनकम टैक्स रिफंड की स्थिति चेक करने के लिए आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल (e-filing Portal) में लॉग इन करें और रिटर्न या फॉर्म देखें को सिलेक्ट करें।

'माई अकाउंट' टैब पर जाएं और 'इनकम टैक्स रिटर्न' चुनें। इसके बाद सबमिट पर क्लिक कर दें। अब एक्नॉलेजमेंट नंबर पर क्लिक करें। 

इसके बाद आयकर रिफंड की स्थिति के साथ आपको आपके रिटर्न की जानकारी वाला एक पेज दिखाई देगा। तो ये दो तरीके हैं ये जानने के.

कब कर सकते हैं रिफंड का दावा? आयकर वापसी का दावा तब किया जा सकता है जब आपने अपने संगठन को सभी निवेश प्रमाण जमा नहीं किए हों। 

कब कर सकते हैं रिफंड का दावा? परिणामस्वरूप, आपके नियोक्ता द्वारा काटे गए कर की राशि वित्तीय वर्ष के लिए आपकी वास्तविक कर देयता से अधिक हो गई है।