NavIC GPS क्या है? | Indian Navigation App NavIC कैसे प्रयोग करें?

किसी उचित स्थान को खोजने के लिए या जाने के लिए हम Google मैप्स का उपयोग करते हैं। अब भारतीय NavIC GPS आ गया है। क्या भारतीय जीपीएस नाविक गूगल मैप्स की जगह ले लेगा? क्या है इंडियन जीपीएस NavIC? कैसे काम करता है? इसकी पूरी जानकारी इस पोस्ट में मिलेगी।

NavIC GPS क्या है?

NavIC GPS को Indian Regional Navigation Satellite System (IRNSS) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ मिल कर विकसित किया गया है।

नाविक पूर्णत स्वदेशी विकसित तकनीक है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय मछुवारों (फिशर-मैन्स) को समरपित करते हुए ईश इंडियन जीपीएस का नाम नाविक रखा है।

भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (IRNSS) को आधिकारिक तौर पर NAVIC कहा जाता है जो Indian NAVigation के लिए एक संक्षिप्त शब्द है।

भारत में और भारतीय मुख्य भूमि के आसपास सटीक स्थिति प्रदान करने के लिए इसरो द्वारा भारत में क्षेत्रीय भू-स्थिति प्रणाली तैयार की गई है।

इसे क्यों बनाया गया है


जब 1999 में पाकिस्तानी सैनिकों ने कारगिल में पोजिशन ली थी, तो भारतीय सेना ने जो पहली चीज मांगी थी, वह थी इस क्षेत्र के लिए ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) डेटा।

अमेरिकी सरकार द्वारा बनाए रखा गया अंतरिक्ष-आधारित नेविगेशन सिस्टम महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता, लेकिन अमेरिका ने भारत को इससे इनकार किया। स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन प्रणाली की आवश्यकता पहले महसूस की गई थी, लेकिन कारगिल के अनुभव ने देश को इसके महत्व का एहसास कराया।

इस satellite system की पहली बार 2007 में घोषणा की गई थी और इसे 2012 तक पूरी तरह कार्यात्मक होना था लेकिन विभिन्न बाधाओं के कारण ऐसा नहीं हुआ। सात में से पहला उपग्रह 2013 में कक्षा में भेजा गया था।

श्रीहरिकोटा से Polar satellite Launching Vehicle (PSLV 31) दिन के 12.50 मिनट पर इस उपग्रह को लेकर उड़ान भरी और ठीक 20 मिनट के बाद इसे पृथ्वी के कक्षा में स्थापित कर दिया।

NavIC नेविगेशन सिस्टम प्रोजेक्ट पर क़रीब 120 करोड़ रुपये की लागत आई है। जिसमें 7 सैटेलाइट्स हैं। जैसे ही 7 नंबर सैटेलाइट वर्क करना शुरू करेगा। वैसा ही हमारा देसी नेविगेशन सिस्टम अमेरिका जितना सटीक हो जाएगा।

आम मोबाइल फोन्स मी या कंप्यूटर मी जीपीएस रिसीवर्स के माध्यम से लोग इस नेविगेशन सिस्टम का यूज कर पाएंगे।

Indian GPS NavIC कैसे काम करता है?


इसरो के अनुसार, IRNSS को स्थलीय, हवाई और समुद्री नेविगेशन, आपदा प्रबंधन, वाहन ट्रैकिंग और बेड़े प्रबंधन और मोबाइल फोन के साथ एकीकरण के लिए विकसित किया गया था।

यह सभी उपयोगकर्ताओं को Standard Positioning Service (SPS) और Restricted Service (RS) प्रदान करेगा, जो केवल अधिकृत उपयोगकर्ताओं के लिए एक एन्क्रिप्टेड सेवा है। इसे 2019 में भारत में सभी वाणिज्यिक वाहनों के लिए अनिवार्य कर दिया गया था।

NavIC 7 सैटेलाइट्स का एक ग्रुप है। जो भारत को पुरा कवर करने में सक्षम है। मैं आपको बता दूं की अमेरिका के पास जो जीपीएस सिस्टम है वो 24 सैटेलाइट वाला है जो पूरी दुनिया को कवर करता है।

पर हमारे जीपीएस सिस्टम की रेंज भले इंडिया तक है पर 5 मीटर की रेंज में ये बिलकुल एक्यूरेसी के साथ रिजल्ट बतायेगा।

अपने स्मार्टफोन पर NavIC GPS का सपोर्ट चेक करें

  • अपने Android स्मार्टफोन पर GSPTest या GNSSTest एप्लिकेशन इंस्टॉल करें।
  • NavIC के समर्थन के बारे में सुनिश्चित होने के लिए आप दोनों में से किसी एक को इनस्टॉल कर सकते हैं।
  • एक बार जब आप इंस्टॉल किए गए ऐप को खोलते हैं, तो “स्टार्ट टेस्ट” पर टैप करें।
  • ऐप अब उपलब्ध सभी नेविगेशन सैटेलाइट का पता लगाना शुरू कर देगा।
  • अगर ऐप भारतीय उपग्रह दिखाता है, तो इसका मतलब है कि आपके फोन में NavIC सपोर्ट है।
  • यह आपके स्मार्टफ़ोन पर NavIC के लिए समर्थन का पता लगाने का सबसे आसान तरीका प्रतीत होता है।

वर्तमान में, स्मार्टफ़ोन के लिए बहुत सीमित सेट इस नई नेविगेशन सुविधा के लिए समर्थन के साथ आते हैं।

लेकिन जैसे-जैसे डिवाइस नए जारी किए गए चिपसेट के साथ लॉन्च होते रहते हैं, अधिक से अधिक डिवाइस उनके स्मार्टफ़ोन पर NavIC समर्थन की उम्मीद करते हैं।

NavIC GPS के फायदे

NavIC का दावा है कि यह अधिक सटीक स्थान प्रदर्शन, और तेज़ टाइम-टू-फर्स्ट-फ़िक्स (TTFF) स्थिति अधिग्रहण को सक्षम करता है। सात उपग्रहों के साथ, इसे अमेरिका स्थित जीपीएस, रूस के ग्लोनास और यूरोप द्वारा विकसित गैलीलियो के बराबर माना जाता है।

यह स्थान-आधारित सेवाओं की बेहतर गुणवत्ता की पेशकश भी करेगा। सिस्टम का दावा है कि प्राथमिक सेवा क्षेत्र में स्थिति सटीकता 20 मीटर से बेहतर है। इसकी तुलना में, 24-सैटेलाइट आधारित जीपीएस सक्षम स्मार्टफोन 4.9 मीटर के दायरे में सटीक हो सकते हैं।

सिस्टम के अन्य एप्लीकेशन में शामिल हैं:

  • हवाई और समुद्री नेविगेशन
  • आपदा प्रबंधन
  • व्यवसायों के लिए ट्रैकिंग वाहन और बेड़े प्रबंधन
  • बेहतर समय
  • बेहतर मैपिंग और जियोडेटिक डेटा कैप्चर
  • हाइकर्स और यात्रियों के लिए स्थलीय नेविगेशन सहायता
  • ड्राइवरों के लिए दृश्य और आवाज नेविगेशन

नाविक के बाद भारत उन देशों की ऐसी में शामिल हो जाएगा जिनके पास खुद का नेविगेशन सिस्टम है।

  • अभी अमेरिका के पास खुद का जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) है।
  • रूस के ग्लोबल सिस्टम का नाम GLONAS है।
  • फ्रांस के नेविगेशन सिस्टम का नाम DORIS है। DORIS एक हाई टेक जीपीएस सिस्टम है। क्यूंकी इसमे अर्थ से भी सैटेलाइट के ट्रैफिक सिग्नल भी जाते हैं। आम तौर पर उपग्रह से पृथ्वी पर सिग्नल प्राप्त करते हैं।
  • यूरोपियन यूनियन भी अपने जीपीएस टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है जो 2020 तक बन कर तयार होगा इसका नाम गैलीलियो है।
  • यहाँ मैं आपको बता दूं की चीन भी अपने नेविगेशन सिस्टम पर काम कर रहा है। जिस्का नाम BIDAU है।

भारत का खुद का जीपीएस नेविगेशन सिस्टम होना देश के लिए गर्व की बात है। क्यों दुनिया के जैसे हालत बदल रहे हैं हम पूरी रास्ते से किसी देश पर निर्भर नहीं हो सकते हैं। क्यूंकी वो जब चाहते हैं अपना नेविगेशन सिस्टम बैंड कर सकते हैं।

भारत का नेविगेशन सिस्टम 1500 किलोमीटर दूर तक नेविगेट कर सकता है जिसमे पुरा साउथ एशिया कवर कर सकता है। भारतीय जीपीएस नाविक पुरे देश को कवर करेगा जिसमे हिंद महासागर के साथ चीन के भी कुछ भाग को नेविगेट करेगा।

युद्ध के समय वेपन्स को ऑपरेट करना और अपने उद्देश्य तक पहुचना बहुत आसन हो जाएगा। सरकार के मुताबिक इस नेविगेशन सिस्टम को दसरे देशो को भी इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाएगी फिलहाल ये स्पष्ट नहीं है की इसके लिए उन्हे पैसे देने होंगे या ये फ्री होगा।

मैं नीतीश वर्मा टेक्निकल मित्र ब्लॉग का ऑथर हूँ। यहाँ आपको बैंकिंग, फाइनेंस, इन्वेस्टमेंट, सरकारी योजनाओं सहित नई टेक्नोलॉजी की जानकारी पोस्ट करता हूँ।

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