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नजदीकी Mobile Tower Radiation का कैसे पता करें?

क्या Mobile Tower Radiation से कैंसर होता है? अपने नजदीकी Mobile Tower Radiation का कैसे पता करें?

क्या मोबाइल टावर रेडिएशन से कैंसर होता है? क्या मोबाइल टावर रेडिएशन आपकी हेल्थ पर बुरा असर डालती है। बहुत लोगो का ऐसा मानना है की मोबाइल टावर के रेडिएशन से बीमार होती है। इसके चलते कई लोग अपने घर के आस पास टावर नहीं लगाने देते हैं।

यहाँ तक की कुछ सोसाइटीज या कॉलोनियां तो टावर ना लगाने के लिए कोर्ट तक चली जाती हैं। कुछ ऐसे ही घटना हमें पिछले साल देखने को मिले। इसमे से अधिकतर मामले रिलायंस जियो के विभिन्न जगहों पर मोबाइल टावर लगाने से जुडी थी।

लोगों में मोबाइल टावर को फैले इस भ्रम को मिटाने के लिए तत्काल दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा ने “तरंग संचार” नाम से एक ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है।

तरंग संचार ऑनलाइन पोर्टल क्या है?

तरंग संचार भारत सरकार का ऑनलाइन पोर्टल है। जिसे तत्कालीन दूरसंचार विभाग (DoT) के द्वारा दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा ने लॉन्च किया है। इस पोर्टल की मदद से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एमिशन यानी की मोबाइल टावर से निकले वाले जो waves (तरंगें) हैं उनको लेकर जो लोगो के बिच भ्रम है उसे मिटाने की कोशिश की जाएगी। इस पोर्टल की मदद से आप किसी ही क्षेत्र में मौजूद मोबाइल टावर की लोकेशन और बहुत से जानकारी का पता लगा सकते हैं।

तरंग संचार पोर्टल लॉन्च होने से पहले एक बहुत ही चौकाने वाला मामला सामने आया। ग्वालियर (मध्य प्रदेश) के एक व्यक्ति जिन्की उम्र 42 साल थी उसे एक शिकायत फाइल करवाई थी की घर के पास मजूद मोबाइल टावर के रेडिएशन से उन्हें कैंसर हो गया है। देश में पहली बार ऐसा हुआ की किसी एक व्यक्ति की शिकायत पर वहां से पुरा मोबाइल टावर ही हटा दिया गया हो। तरह की घटनाओं को रोकने के लिये इस पोर्टल को लॉन्च किया गया है।

जानकारी के अनुसार इस पोर्टल को लम्बे समय से विकसित किया जा रहा था। इसके हेल्प से आप अपने आस पास मौजुद टावर देख सकते हैं।

यहाँ आप 4,68,324 मोबाइल टावर्स और 17,73,639 बेस ट्रांसीवर (बीटीएस) का डेटा है। ये डेटा अपडेट होता रहता है। पोस्ट लिखे जाने तक 30 अप्रैल 2018 तक का डेटा अपडेट है। आप इन टावर के टाइप्स 2जी/3जी/4जी पता कर सकते हैं साथ ही ये ईएमएफ के पैरामीटर्स को फॉलो करते हैं या नहीं सब पता कर सकते हैं।

यान्हा मैं आपको बता दूं की मैं खुद एक टेलीकॉम इंजीनियर हूं, और मेरा फील्ड भी नेटवर्क टेस्टिंग का है। तो मैं इन चीजों को अच्छे तरके से आप तक लाने की कोशीश करुंगा।

Mobile Tower Radiation पता करने के लिए तरंग संचार का प्रयोग कैसे करेंगे?

तरंग संचार के पोर्टल पर जाने के लिए आप https://tarangsanchar.gov.in/EMFPortal/Home क्लिक करें।

इस पोर्टल को बहुत ही जानकारीपूर्ण बनाया गया है। वैसे तो यहाँ बहुत सी जानकारी दी गई है। जो सबसे इंट्रेस्टिंग है वो है किसी एरिया के में लगे टावर्स को ढूंढना और उनकी डिटेल निकालना।

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अपने एरिया में टेलीकॉम टॉवर का पता लगाएँ

होम पेज पर आपको “Locate Telecom Tower in Your Area” का विकल्प मिल जाता है।आप अपने एरिया का नाम या पिनकोड डालकर भी उस एरिया को सर्च कर सकते हैं।

एरिया सर्च करने के बाद आपको टावर डिटेल्स और ईएमएफ स्टेटस पता करने के लिए कुछ डिटेल्स देनी होगीं। । जिसमे आपका नाम ईमेल और मोबाइल नंबर मांगा जाता है।

विवरण भरने के बाद आपके ईमेल पर ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) भेजा जाता है। जिसको एंटर करके वेरिफिकेशन पूरा कर लेना है।

अब आपके सामने एरिया का मैप ओपन हो जाता है। फिर सभी मोबाइल टावर्स की पिन लोकेशन आपके सामने आ जाती है।

यहाँ टावर्स के टाइप्स को 3 पार्ट में डिवाइड किया गया है। ग्राउंड बेस्ड, रूफ टॉप और वॉल माउंटेड।

मोबाइल टावर के कितने प्रकार हैं ?

ग्राउंड बेस्ड टावर: ग्राउंड बेस्ड टावर ऐसे होते हैं। जिन्हे जमीन पर लगाया जाता है। इनकी एक विशिष्ट ऊंचाई होती है।

रूफ टॉवर: जैसा की आप नाम से ही समझ रहे हैं ये टावर्स घरो या बिल्डिंग्स के रूफ पर लगे जाते हैं।

वॉल माउंटेड टावर्स: ये इंडोर या आउटडोर दोनो हो सकते हैं। इन दीवारों पर फ़िट किया जाता है। मान लिए कोई संकरी गली या रास्ता या व्यस्त बाजार है तो ऐसी जगह दीवार माउंट टावर इंस्टाल कर दिया जाता है। मेट्रो स्टेशन, ये बड़े अपार्टमेंट्स में भी इंडोर इस्को इंस्टाल किया जाता है।

जैसा की आप देख सकते हैं मैंने अपने होम बिहार, दरभंगा की जगह चुनी है। यहाँ मैं आस पास लगे सभी टावर्स देख सकता हूं।

आप यहाँ किसी भी टावर पर क्लिक कर के उसकी डिटेल पता कर सकते हैं। उस टावर का पता देख सकते हैं। टावर पे किस ऑपरेटर का एंटीना लगा हुआ है। टावर का टाइप क्या है। सब पता कर सकते हैं। साथ ही टावर की तस्वीर भी आपके सामने आती है। और अगर इसे भी अधिक विवरण आप पता करना चाहते हैं तो “additional information” पर क्लिक करें आपके मेल पर विवरण भेज दे जाती है।

देखा जाए तो ये पोर्टल सच में बहुत शानदार है। अभी से पहले इंडिया में ऐसी कोई पब्लिक पोर्टल नहीं थी। कुछ ऑपरेटर्स ने ओपन नेटवर्क दे रखा है। जिस आप उसी ऑपरेटर्स के टावर देख पाते हैं। लेकिन यहाँ सभी ऑपरेटरों के मोबाइल टावर की जानकारी बहुत आसान से आपके पास आ जाती है।

हमारे यहाँ सब्सक्राइबर्स इन बातों पर उतना ध्यान नहीं देते, लेकिन परेशानी मुक्त टेलीकॉम सर्विस प्राप्त करना एक यूजर का हक है जिसके लिए कुछ जागरुक होना होगा। मैं एक टेलीकॉम इंजीनियर हूं। मेरे विचार से ये साइट बहुत ही सही है । किसी एरिया में लगे टावर्स की जानकारी आप घर बैठे निकल सकते हैं।

घर के Mobile Tower Radiation कैसे चेक करवाएं ?

अच्छा अगर आपको लगता है की आपके कॉलोनी में या क्षेत्र में रेडिएशन बहुत अधिक है। या फिर मोबाइल टावर से जुडी कोई और समय है तो आप ने जो मेल के लिए अनुरोध किया है वहां आपको “Would you like to request for a Public measurement?” का लिंक मिलता है।

जिसपे क्लिक करके आप ऑन साइट सर्वे करवा सकते हैं। जिसके लिए आपको 4000 रुपये भुगतान करेंगे। इसके बाद वहां डिपार्टमेंट से जुड़े अधिकारी आएंगे और सर्वे पूरा कर के जाएंगे।

आप भी चाहते हैं तो अपने आस पास ये सर्वे करवा सकते हैं। या फिर क्षेत्र के लोग मिल कर योगदान कर के भी कर सकते हैं।

क्या Mobile Tower Radiation से कैंसर होता है?

अगर इस सवाल का जवाब दिया जाए तो नहीं.. मोबाइल टावर रेडिएशन से कैंसर नहीं होता है। इसके पीछे ये तर्कदिया जाता है की मोबाइल टॉवर से निकलने वाली तरंगे मजबूत नहीं होती है की वो आपके शरीर पर कोई प्रभाव डाल सके।

इंडियन रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. भाविन झाखरिया के अनुभव “हम एक्स रे रेडिएशन के बिच 115 सालो से भी ज्यादा समय से रहे हैं। लेकिन अभी तक रेडिएशन और कैंसर के बीच के संबंध का पता नहीं चल पाया। लेकिन मोबाइल टॉवर रेडिएशन की बात करें तो अलग तरह की बात है। मोबाइल टावर का रेडिएशन बस X-Ray का रेडिएशन जैसा रेडिएशन नहीं होता है।

वहीँ दुसरी तरफ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के प्रो. वसंत नटराजन के अनुसार “सेलफोन से निकलने वाले फोटोन पार्टिकल्स में इतनी एनर्जी नहीं होती है की आपके बॉडी के डीएनए में कोई चेंजिंग कर दे। सूरज से अर्थ तक आने वाली एनर्जी 1000 वाट/मीटर स्क्वायर होती है जो की हमारे लिए नुकसानदायक होता है।”

धूप में खड़े होने से शरीर को विटामिन डी मिलता है लेकिन बहुत समय तक खड़े होने तक हीट स्ट्रोक या सन बर्न हो सकता है। इसलिय किसी भी चीज की अधिकता बॉडी को नुकसान पहुंचासकती है। इसी चलते मोबाइल टावर को लेकर भी कुछ सुरक्षा मानकों का ख्याल रखा जाता है।

अब अगर मोबाइल टावर्स की बात करें तो ये हमारे बीच पिचले कुछ 30-40 साल से हैं। मोबाइल टॉवर के मानव प्रभाव को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) समेत कई संगठनों ने शोध किया है। इसके साथ ही विभिन्न देशों पर की गई करीब 25 हजार स्टडीज की गई। जिसमें ये बताया गया की मोबाइल टावर रेडिएशन और इंसान के स्वास्थ्य में कोई रिश्ता नहीं है। यहाँ तक की इंडिया में भी कई बार बताया गया है की सेफ्टी रूल्स को फॉलो करना पर मोबाइल टावर से हेल्थ पर किसी का असर नहीं हुआ है। इंडिया में इसके लिए कड़े सुरक्षा मानक हैं।

इंडिया में हाई कोर्ट कमेटी से जारी किए गए निर्देश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की तरफ से जनवरी 2014 में गठित की गई एक समिति के अनुसार सेलफोन और इनके टावर से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (ईएमएफ) उत्सर्जन से मानव शरीर के ऊपर किसी का प्रभाव नहीं पड़ता है।

भारत सरकार भी इस मामले में सख्ती से निगरानी कर रही है। भारत में इस मामले में कई कड़े सुरक्षा नियम बने हुए हैं। रूल्स का पालन ना करने पर कंपनीज को 10 लाख तक जुर्माना भी लगा जा सकता है।

दूरसंचार विभाग ने अपने इस नए पोर्टल तरंग संचार पर कई रिसर्च और सूचना दे रखी है।

इस बारे में आपके कोई सुझाव हैं या टेलीकॉम से जुडी और भी कोई जानकारी लेना चाहते हैं तो हमें कमेंट में जरूर बताएं। पोस्ट को शेयर करें कीजिये ताकि दूसरों को भी इसकी जानकारी मिल सके।

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